‘भारत आना घर वापसी जैसा’: रिटायरमेंट के बाद दिल्ली पहुंचीं सुनीता विलियम्स, बताया स्पेस से कैसी दिखती है धरती

भारत के 4-5 दिवसीय दौरे पर आईं सुनीता विलियम्स ने दिल्ली में लोगों का दिल जीत लिया। गुजरात के मेहसाणा से ताल्लुक रखने वाली सुनीता ने कहा कि अंतरिक्ष से धरती को देखने पर अहसास होता है कि हम सब एक हैं और हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां:
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अगली पीढ़ी को संदेश: उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष की खोज में अब युवाओं को अपनी जगह बनानी होगी। उन्होंने जिम्मेदारी सौंपने और परिवार को समय देने की इच्छा जताई।
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विविधता का जश्न: उन्होंने ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) पर बिताए उन कठिन 9 महीनों को याद किया जब उन्होंने अलग-अलग संस्कृतियों के क्रू मेंबर्स के साथ त्योहार मनाए थे।
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भारत दौरा: दिल्ली में कार्यक्रमों के बाद, संभावना है कि सुनीता विलियम्स 22 से 25 जनवरी के बीच होने वाले ‘केरल लिटरेचर फेस्टिवल’ में भी शिरकत करेंगी।
9 दिसंबर 2006 को अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा शुरू करने वाली सुनीता विलियम्स ने 27 साल के लंबे सफर के बाद नासा को अलविदा कह दिया है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने अंतिम मिशन की चुनौतियों को याद किया, जो तकनीकी खराबी के कारण 10 दिन से बढ़कर 9.5 महीने का हो गया था।
सुनीता विलियम्स का रिकॉर्ड करियर:
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अंतरिक्ष में समय: उन्होंने नासा के 3 प्रमुख मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए।
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स्पेस वॉक रिकॉर्ड: उन्होंने 9 बार स्पेस वॉक की, जिसमें कुल 62 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की—जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए एक रिकॉर्ड है।
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स्पेस मैराथन: वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली यात्री बनीं।
सेमिनार के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे को एक बड़ी चुनौती बताया और कहा कि इसे मैनेज करने के लिए नई तकनीक की सख्त जरूरत है।



