राज्य आनंद संस्थान की राष्ट्रीय संगोष्ठी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वितरित किए आनंदोत्सव पुरस्कार, अधिकारियों को दिया ‘कुशल व्यवहार’ का मंत्र

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में आनंद विभाग के प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक शासकीय सेवकों के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, ताकि वे स्वयं प्रसन्न रहकर नागरिकों के साथ बेहतर और कुशल व्यवहार कर सकें।
प्रमुख वक्ताओं के विचार हरिद्वार से आए महर्षि मधुसूदन जी महाराज ने गीता के तत्व ज्ञान और ‘परफेक्शन’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता का ज्ञान भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में मार्गदर्शक है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और लंदन के विद्वानों ने भी गीता के ‘आनंद तत्व’ को स्वीकार किया है। दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव श्री अभय महाजन सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए।
मुख्य बिंदु:
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विरासत और मूल्य: विद्यार्थियों को स्कूलों और कॉलेजों में मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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ऐतिहासिक संदर्भ: मुख्यमंत्री ने 1956 के विश्व हिंदू सम्मेलन और मार्गरेट थैचर के उस वक्तव्य को याद किया, जिसमें भारतीय परिवार व्यवस्था की सराहना की गई थी।
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विजेताओं का सम्मान: विभिन्न श्रेणियों में 25 हजार, 15 हजार और 10 हजार रुपये के पुरस्कार प्रदान किए गए।



