डोंगला वेधशाला में अंतरिक्ष अनुसंधान पर मंथन: 2040 तक चंद्रमा पर कदम रखेगा भारत, AI और स्पेस इकोनॉमी पर विशेषज्ञों ने दिए विचार

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्पेस इकोनॉमी के समन्वय पर विस्तृत प्रकाश डाला। वेधशाला के सत्रों में यह उभरकर आया कि अंतरिक्ष तकनीक अब केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।
तकनीकी सत्रों का सार:
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अंतरिक्ष आधारित रणनीतियां: डॉ. वी.के. सारस्वत ने बताया कि आधुनिक युद्धक प्रणालियां अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर ड्रोन और AI आधारित प्रणालियों की ओर स्थानांतरित हो रही हैं।
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वायुमंडल का प्रभाव: विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के निदेशक डॉ. तरुण पंत ने आयनोस्फियर और ऊपरी वायुमंडल के अध्ययन को पृथ्वी की जलवायु समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
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स्पेस इकोनॉमी: विशेषज्ञों ने कहा कि निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भागीदारी से अंतरिक्ष क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, जो ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करेंगे।



