नारी शक्ति वंदन सम्मेलन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोर्ड टॉपर छात्राओं को सराहा, महिला आरक्षण को बताया ऐतिहासिक कदम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका में लाना है। प्रबुद्ध जन सम्मेलन में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 27 महिला विधायक और 6 महिला सांसद नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया, सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय राजनीति में महिलाओं ने हमेशा अदम्य साहस का परिचय दिया है।सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने सभी दलों से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के सफल क्रियान्वयन में सहयोग मांगा। वहीं राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने 106वें संविधान संशोधन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं के सीमित प्रतिनिधित्व की खाई को पाटेगा। शिक्षाविद सुश्री शोभा पैठनकर ने महिलाओं के सात दिव्य गुणों का उल्लेख करते हुए उन्हें नेतृत्व का असली आधार बताया। यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक रहा कि मध्यप्रदेश अब “महिला कल्याण” से आगे बढ़कर “महिलाओं के नेतृत्व में विकास” (Women-led Development) की राह पर है।
प्रमुख बिंदु:
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ऐतिहासिक घोषणा: मुख्यमंत्री ने 16 अप्रैल 2026 को महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया और 33% आरक्षण लागू होने की तुलना दिवाली-होली के जश्न से की।
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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: डॉ. यादव ने अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती और उनके द्वारा काशी विश्वनाथ धाम के पुनरुद्धार का स्मरण किया।
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छात्राओं का सम्मान: बोर्ड परीक्षा की टॉपर बालिकाओं को मंच पर सराहा गया। सरस्वती वंदना करने वाली छात्राओं को अंगवस्त्रम, नारियल और पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया।
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मध्यप्रदेश का मॉडल: प्रदेश में नगरीय निकायों में 50% महिला आरक्षण और महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं की भागीदारी को देश के लिए उदाहरण बताया गया।
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प्रमुख उपस्थिति: कार्यक्रम में राज्य सरकार की सभी महिला मंत्री (श्रीमती संपतिया उईके, सुश्री निर्मला भूरिया, श्रीमती कृष्णा गौर, श्रीमती प्रतिमा बागरी, श्रीमती राधा सिंह) और सांसद श्रीमती लता वानखेड़े उपस्थित रहीं।



