मध्य प्रदेश में श्वेत क्रांति का विस्तार: 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ेगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की संचालन समिति की बैठक में डेयरी क्षेत्र के व्यापक विस्तार की रूपरेखा प्रस्तुत की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विशेष रूप से दुग्ध समितियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डेयरी के जरिए मजबूत करने पर बल दिया।

बैठक के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीडीबी के अनुभव का लाभ उठाकर मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डेयरी उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए नई मार्केटिंग रणनीति और आकर्षक पैकेजिंग डिजाइन अपनाई जाए। डॉ. यादव ने यह भी सुझाव दिया कि किसानों को नवाचारों के लिए प्रेरित करने हेतु जिला स्तर पर सूचना सम्प्रेषण और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।

सांख्यिकीय डेटा साझा करते हुए बैठक में बताया गया कि एनडीडीबी और राज्य सरकार के अनुबंध के बाद जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दिखे हैं। प्रदेश में 153 नए बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए हैं और दूध की बिक्री पर दी जाने वाली क्रेडिट व्यवस्था को पूर्णतः बंद कर दिया गया है। निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए ‘फील्ड फोर्स मॉनीटरिंग ऐप’ और दुग्ध प्रदायकों के लिए विशेष मोबाइल ऐप की शुरुआत की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

प्रसंस्करण क्षमताओं के संबंध में जानकारी दी गई कि शिवपुरी में 20 हजार लीटर क्षमता का नया संयंत्र निर्माणाधीन है। पशु आहार संयंत्रों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है ताकि उत्पादन लागत में कमी आए और पशुपालकों को लाभ मिले। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, एनडीडीबी के अध्यक्ष मीनेष शाह और कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल सहित वित्त और पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का समावेश और पारदर्शी कार्यप्रणाली ही किसानों की आय दोगुना करने के सपने को साकार करेगी।

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