मध्यप्रदेश में मकानों की गणना का पहला चरण अंतिम दौर में, 30 मई तक पूरा होगा डिजिटल संकलन

मध्यप्रदेश में आगामी जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत मकानों की सूची तैयार करने और उनकी गिनती का काम बेहद तेजी से अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। राज्य में 1 मई से शुरू हुआ यह जमीनी (फील्ड) सर्वे आगामी 30 मई 2026 तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत सूबे के तमाम शहरी और ग्रामीण इलाकों में प्रगणक (इन्यूमरेटर) घर-घर जाकर हर मकान, परिवार और अन्य ढांचों से जुड़ी आवश्यक जानकारियां डिजिटल ऐप के जरिए जुटा रहे हैं।

गृह सचिव एवं जनगणना कार्य की नोडल अधिकारी श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि राज्य में जनगणना से जुड़ा पूरा काम तय शेड्यूल के मुताबिक निरंतर आगे बढ़ रहा है। इस पूरी कवायद के लिए प्रदेशभर में 1 लाख 37 हजार से ज्यादा ‘मकान सूचीकरण ब्लॉक’ (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स) तैयार किए गए हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से नोडल अधिकारी ने बताया कि 25 मई 2026 तक राज्य के 1 लाख 34 हजार 309 ब्लॉकों में सर्वे का काम सफलतापूर्वक निपटाया जा चुका है। इसके तहत अब तक कुल 2 करोड़ 39 लाख 9 हजार 808 मकानों की गिनती पूरी कर ली गई है। उन्होंने भरोसा जताया कि बचे हुए हिस्सों में भी निर्धारित समयावधि के भीतर काम खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें जारी हैं और आगामी 30 मई 2026 तक पूरे राज्य में यह प्रक्रिया मुकम्मल हो जाएगी।

इससे पहले, आम लोगों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने के लिए 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक ‘स्व-गणना’ (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प दिया गया था। इस प्रक्रिया में प्रदेश के नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और करीब 7 लाख 46 हजार 158 परिवारों ने खुद ऑनलाइन माध्यम से अपना ब्योरा दर्ज कराया। जनता के इस सकारात्मक रुख से पूरे अभियान को काफी मजबूती और गति मिली।

इस मर्तबा देश की इस सबसे बड़ी कवायद को पूरी तरह से आधुनिक और डिजिटल रूप दिया गया है। फील्ड में तैनात कर्मचारी ‘एचएलओ ऐप’ (HLO App) का इस्तेमाल कर डेटा फीड कर रहे हैं, जबकि पूरे काम की मॉनिटरिंग भी रियल-टाइम डिजिटल सिस्टम से की जा रही है। इस तकनीकी बदलाव से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, सटीकता और तेजी देखने को मिल रही है।

इस महाअभियान को कामयाब बनाने के लिए जिला प्रशासन, स्थानीय अधिकारियों, प्रगणकों और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय देखा जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जनता से यह विशेष अनुरोध किया गया है कि वे अपने घर आने वाले कर्मचारियों को बिल्कुल सटीक और सही जानकारी दें। गौरतलब है कि इस प्रक्रिया से मिलने वाले प्रामाणिक आंकड़ों के आधार पर ही सरकार भविष्य की जनकल्याणकारी नीतियां, बजट और विकास योजनाएं तैयार करती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button