अनूपपुर और शहडोल में नर हाथी ‘ई-5’ का सफल रेस्क्यू, बांधवगढ़ परिक्षेत्र में सुरक्षित भेजा गया

मध्यप्रदेश के अनूपपुर और दक्षिण शहडोल वन मंडल के अधिकार क्षेत्र में बीते कई दिनों से सक्रिय नर हाथी ‘ई-5’ को वन विभाग की विशेष टीम द्वारा सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा-निर्देशों के तहत 22 और 23 मई को चले इस बड़े अभियान के बाद हाथी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। इस हाथी की वजह से हाल ही में क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की कई घटनाएं हुई थीं, जिसमें जान-माल और मकानों को नुकसान पहुंचा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एल. कृष्णमूर्ति के मार्गदर्शन में दक्षिण शहडोल वन मंडल के केशवाही रेंज में यह ऑपरेशन चलाया गया।
इस रेस्क्यू और ट्रांसलोकेशन ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक ने हाथी सलाहकार समिति और वरिष्ठ फील्ड अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर पूरी रणनीति तैयार की थी। इसके बाद मैदानी स्तर पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय और शहडोल के मुख्य वन संरक्षक श्री महेंद्र प्रताप सिंह के संयुक्त नेतृत्व में काम शुरू हुआ। इस मिशन में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, दक्षिण शहडोल, उत्तर शहडोल और अनूपपुर वन मंडलों की संयुक्त टीमों को तैनात किया गया था।
अभियान को धरातल पर उतारने से पहले वन विभाग द्वारा प्रभावित इलाकों में जमीनी निगरानी, रात्रिकालीन गश्त, ड्रोन की मदद से मॉनिटरिंग और हाथी की रीयल-टाइम ट्रैकिंग की गई। संवेदनशील गांवों के निवासियों को सतर्क करने के लिए लाउडस्पीकर से घोषणाएं की गईं और वन अमला लगातार स्थानीय लोगों के संपर्क में रहा। इस ऑपरेशन के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से विशेष तौर पर प्रशिक्षित कुमकी हाथियों, महावतों, वन्यजीव डॉक्टरों और वन कर्मियों की टीम बुलाई गई थी, ताकि ‘ई-5’ के व्यवहार को नियंत्रित और शांत रखा जा सके।
रणनीति के अगले चरण में 20 मई को पूरे क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण कर अंतिम कार्ययोजना तय की गई। इसी शाम महावतों ने कुमकी हाथियों के माध्यम से ‘ई-5’ से पहला संपर्क बनाया, जहां उसने कुमकी हाथी ‘रामा’ के प्रति शांत व्यवहार दिखाया। इससे वन्यजीव विशेषज्ञों को यह समझने में मदद मिली कि यह हाथी अपने झुंड से अलग होने के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव में था। इसके बाद सक्रिय रेस्क्यू की तैयारी पूरी की गई।
इसके बाद 22 मई की सुबह करीब 5 बजे हाथी को बेहोश करने (ट्रैंक्विलाइजेशन) की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, जीपीएस कॉलर पहनाने और ट्रांसपोर्ट क्रेट में लोड करने के दौरान हाथी ने भारी प्रतिरोध किया, जिससे पिंजरे और जीपीएस कॉलर को आंशिक नुकसान पहुंचा। इस अप्रत्याशित व्यवहार के कारण अभियान को एक दिन के लिए रोककर पिंजरे की मरम्मत की गई और नई रणनीति बनाई गई। अगले दिन 23 मई को दोबारा ऑपरेशन शुरू हुआ और पशु चिकित्सकों की देखरेख में क्रमिक ट्रैंक्विलाइजेशन, रेडियो कॉलरिंग और क्रेन-जेसीबी की मदद से हाथी को सुरक्षित रूप से वाहन में लोड कर बांधवगढ़ परिक्षेत्र भेज दिया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सफलता पर वन विभाग की सराहना करते हुए कहा कि हाथी जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के महत्वपूर्ण संरक्षक हैं, और राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण व मानव सुरक्षा दोनों के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स का गठन, रेडियो टैगिंग, ‘हाथी मित्र’ दलों का गठन और ई-आई सर्विलेंस प्रणाली जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इसके साथ ही, हाथी के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के आश्रितों के लिए मुआवजा राशि को बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया है।

