मध्य प्रदेश में बुजुर्गों के सामाजिक और कानूनी संरक्षण के लिए उठाए गए बड़े कदम, सरकार ने योजनाओं को दी नई गति

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश शासन द्वारा राज्य के वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों के संरक्षण के लिए सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को एक नई दिशा प्रदान की गई है। बदलती पारिवारिक और सामाजिक संरचनाओं के बीच बुजुर्गों की उचित देखरेख सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान में कई बहुआयामी और प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

बुजुर्गों को कानूनी अधिकार प्रदान करने के लिए राज्य में ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007’ को कड़ाई से लागू किया गया है। इस कानून के तहत यदि कोई वरिष्ठ नागरिक स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो उसे अपने बच्चों या आश्रितों से गुजारा भत्ता प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार है।

इस कानूनी व्यवस्था को सुलभ बनाने के लिए प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपीलीय अधिकरण का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी नियुक्त किया गया है, ताकि पीड़ित बुजुर्गों को त्वरित और स्थानीय स्तर पर न्याय मिल सके। कानून में वरिष्ठजनों की उपेक्षा या उन्हें बेसहारा छोड़ने को एक दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।

संस्थागत देखरेख के अंतर्गत प्रदेश में स्थानीय निकायों और संस्थाओं के सहयोग से वृद्ध आश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ आश्रय, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। इसी क्रम में भोपाल में निर्मित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक आधुनिक उदाहरण है, जहाँ वातानुकूलित कमरों, पुस्तकालय, फिजियोथेरेपी और चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से बुजुर्गों को एक उच्च स्तरीय और सुरक्षित जीवन वातावरण दिया जा रहा है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार की ‘अटल वयो अभ्युदय योजना’ के तहत स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका जैसे क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। बुजुर्गों को समाज से जोड़े रखने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद और कौशल विकास जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। आपातकालीन सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन ‘एल्डर लाइन 14567’ क्रियाशील है, जो परामर्श और त्वरित समाधान प्रदान करती है।

प्रशासनिक नवाचारों के अंतर्गत सरकार ने नियम बनाया है कि यदि कोई शासकीय कर्मचारी अपने माता-पिता की उपेक्षा करता है, तो उसके वेतन से भरण-पोषण की राशि काटकर सीधे माता-पिता के बैंक खाते में भेजी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर 100 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को “शतायु सम्मान” से नवाजा जाता है। ये सभी प्रयास सामूहिक रूप से मध्य प्रदेश को एक संवेदनशील और समावेशी राज्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

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