भोपाल के ‘सदानीरा समागम’ में गूंजा मध्यप्रदेश का जल संवर्धन अभियान, अंतराष्ट्रीय राजनयिकों ने सराहा जनभागीदारी का मॉडल

मध्यप्रदेश में पारंपरिक जल स्रोतों और नदियों के कायाकल्प के लिए चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के रूप में उभर रहा है। भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ के दौरान विभिन्न महाद्वीपों के राजनयिकों ने प्रदेश के इस जल प्रबंधन ढांचे को आज के समय की सबसे बड़ी वैश्विक मांग माना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित इस अभियान को साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर के नीति निर्माताओं ने वैश्विक पटल पर एक अनुकरणीय उदाहरण के तौर पर स्वीकार किया है।
अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के मंच से साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने संवाद करते हुए कहा कि पानी का संकट पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर विषय है और इसके समाधान के लिए जनता को जागरूक करना एक महत्वपूर्ण कदम है। वीर भारत न्यास के साथ संवाद को सकारात्मक बताते हुए उन्होंने घोषणा की कि साइप्रस का सांस्कृतिक दल आगामी 20-21 जून 2026 को भोपाल में अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देगा।
फिजी गणराज्य के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने इस अवसर पर पर्यावरण परिवर्तन को एक साझा वैश्विक संकट बताया। उन्होंने भारत और फिजी के बीच 1948 से चले आ रहे ऐतिहासिक और प्रगाढ़ संबंधों को याद करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि भले ही दोनों देशों के बीच बड़ी भौगोलिक दूरी हो, लेकिन मानव जीवन और प्रकृति की रक्षा के मामले में दोनों देशों के सरोकार और विचार एक समान हैं।
आयोजन में मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एड्रियन ने कहा कि जल और नदियों को संस्कृति से जोड़ना एक बेहद सराहनीय कदम है, क्योंकि दोनों ही देश प्राचीन सभ्यताओं के प्रतिनिधि हैं और सामूहिक सहयोग से इस समस्या का साझा समाधान निकाला जा सकता है। नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने इस समागम को प्रकृति के प्रति कर्तव्यों को याद दिलाने वाला बताया। उन्होंने स्थानीय ट्राइबल म्यूजियम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और नेपाल के सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं में इतनी समानता है कि उन्हें यहाँ आकर अपने ही गांव जैसा अहसास हुआ।
इस अभियान के वैश्विक प्रसार के तहत त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने इस प्रयास को सांस्कृतिक माध्यमों से पर्यावरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक बेहतरीन जरिया बताया। वहीं इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने मध्यप्रदेश शासन और वीर भारत न्यास की कोशिशों की सराहना करते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश से प्रेरणा लेकर वे जल्द ही अपने देश इक्वाडोर में भी जल संरक्षण के प्रति समर्पित ‘सदानीरा संगम’ का आयोजन सुनिश्चित करेंगे।
एशिया, यूरोप, दोनों अमेरिकी महाद्वीपों और कैरेबियन देशों के राजनयिकों की इस सहभागिता ने मध्यप्रदेश के जल मॉडल को वैश्विक पहचान दी है। राज्य सरकार ने जल आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए अब तक 2 लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण व पुनरुद्धार पूरा कर लिया है, जिसे आगे 3 लाख 66 हजार तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही यह स्वीकार्यता प्रदेश के जनभागीदारी मॉडल को दुनिया भर के लिए प्रेरणा स्रोत बना रही है।


