‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत मध्य प्रदेश पुलिस को बड़ी कामयाबी, देश के विभिन्न राज्यों से 8 लापता बच्चों को सकुशल छुड़ाया

मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा गुमशुदा और अगवा किए गए बच्चों की सुरक्षित घर वापसी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन मुस्कान” के तहत बीते एक सप्ताह में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने देश के सुदूर राज्यों में दबिश देकर 8 नाबालिग बच्चों को बरामद किया और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया। यह मुहिम केवल बच्चों को खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टूटे हुए परिवारों को दोबारा जोड़ने का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय प्रयास बन चुकी है, जिसमें पुलिस अधिकारी और जवान पूरी कर्मठता तथा आधुनिक तकनीक के सहारे जुटे हुए हैं।

इस अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने कड़ी मेहनत, मुखबिर तंत्र, तकनीकी विश्लेषण और अंतर-राज्यीय समन्वय का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों की पुलिस ने इस एक सप्ताह के भीतर जिन बच्चों को रेस्क्यू किया है, उनका विवरण इस प्रकार है:

  • बालाघाट और शिवपुरी: बालाघाट जिले के मलाजखंड और किरनापुर थाना पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाइयों में तेलंगाना और हैदराबाद से दो नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित बरामद किया। वहीं, शिवपुरी जिले की रन्नौद थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए अपहरण के एक मामले में उत्तर प्रदेश के मोठ (झांसी) इलाके से एक नाबालिग लड़की को सकुशल दस्तयाब किया।

  • अनूपपुर और खंडवा: अनूपपुर की बिजुरी थाना पुलिस ने राजस्थान के जोधपुर से एक लापता लड़की को खोज निकाला। एक अन्य बेहद संवेदनशील मामले में, खंडवा जिले की पदमनगर पुलिस ने महाराष्ट्र के अकोला स्थित ‘चाइल्ड लाइन’ से 14 साल के एक मूक-बधिर और दिव्यांग बालक को सुरक्षित ढूंढकर उसके माता-पिता के सुपुर्द किया।

  • इंदौर, बड़वानी और टीकमगढ़: इंदौर जीआरपी की उज्जैन थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच की मदद से गुजरात के सूरत शहर से 17 वर्षीय किशोर को बरामद किया। बड़वानी जिले की राजपुर पुलिस ने भी गुजरात से एक नाबालिग लड़की को सुरक्षित निकाला। इस मामले में पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर एक गंभीर अपराध का पर्दाफाश करते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की है। इसके अलावा, टीकमगढ़ की बलदेवगढ़ पुलिस ने देश की राजधानी दिल्ली से एक नाबालिग लड़की को खोज निकाला।

इन तमाम अभियानों में मध्य प्रदेश पुलिस के जवानों ने सीमित संसाधनों और विषम परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। अन्य राज्यों की स्थानीय पुलिस और एजेंसियों से बेहतर तालमेल बिठाकर इन बच्चों की वापसी सुनिश्चित की गई।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि किसी भी लापता बच्चे को खोजना महज एक कानूनी केस को सुलझाना नहीं है, बल्कि एक परिवार की उम्मीदों और खुशियों को वापस लौटाना है। इसी सेवा भावना के साथ प्रदेश में “ऑपरेशन मुस्कान” लगातार चलाया जा रहा है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी बच्चे के लापता होने या संदिग्ध अवस्था में दिखने की कोई भी सूचना मिले, तो तुरंत नजदीकी थाने या डायल-112 पर संपर्क करें, ताकि समय रहते बच्चों को सुरक्षित बचाया जा सके।

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