ट्रम्प की ग्रीनलैंड वाली टिप्पणी पर बवाल: जानिए क्या है पूरा विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग को दोहराया है। ट्रम्प का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की सक्रियता को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का अधिकार होना अनिवार्य है। एयर फोर्स वन पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि यह मांग पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा जरूरतों पर आधारित है।
ट्रम्प के इस रुख से डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेतृत्व में भारी नाराजगी है। डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सेन ने दो टूक शब्दों में इसे खारिज कर दिया है। दूसरी ओर, ग्रीनलैंड के पीएम नीलसन ने इसे देश की संप्रभुता का अपमान माना है। जानकारों का कहना है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और उन पर न्यूयॉर्क में ड्रग तस्करी का मुकदमा चलाने की कार्रवाई के बाद, ट्रम्प का यह नया बयान अमेरिका के आक्रामक विदेश नीति रुख को दर्शाता है, जिससे यूरोपीय सहयोगियों के साथ संबंधों में खटास आ सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण वाले बयान ने एक नया वैश्विक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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ट्रम्प का तर्क: राष्ट्रपति ने एयर फोर्स वन और ‘द अटलांटिक’ को दिए बयानों में कहा कि रक्षा की दृष्टि से ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए जरूरी है। उन्होंने वहां रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी को बड़ी सुरक्षा चूक बताया।
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डेनमार्क का पलटवार: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने इस विचार को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘बेतुका’ (Absurd) बताया है।
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ग्रीनलैंड की आपत्ति: ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने ट्रम्प की भाषा को अपमानजनक और गलत करार दिया है।
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तनावपूर्ण पृष्ठभूमि: यह विवाद ऐसे वक्त में सामने आया है जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क भेज दिया है, जहां उन पर ड्रग तस्करी के गंभीर आरोपों में केस चलाया जाएगा।



