किसानों के सम्मान में ‘कृषि लोकरंग’: पुराने बीजों का जतन करने वालों और लखपति किसानों को मिलेगा प्रदेश स्तर पर मंच

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गांव-गांव में ‘कृषि ग्राम सभा’ और ‘कृषि उत्सव’ मनाए जाएं। 26 जनवरी से शुरू होने वाले पांच दिवसीय ‘कृषि लोकरंग’ में सायकिल प्रतियोगिता, पारंपरिक लोक गीत और फसल-मौसम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी।
विशेष आकर्षण:
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सफल किसानों से सीधा संवाद: सोयाबीन, मक्का और मूंग जैसी फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन करने वाले किसान अपनी सफलता की कहानी साझा करेंगे।
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संस्कृति विभाग की सहभागिता: वीर भारत न्यास के सहयोग से कृषि को एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
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ओपन माइक सत्र: किसानों और युवाओं के लिए ‘ओपन माइक’ की सुविधा होगी, जहाँ वे कृषि के भविष्य पर अपने विचार रख सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि इस पूरे आयोजन का उद्देश्य किसानों में स्वाभिमान जगाना और खेती को लाभ का धंधा बनाने के साथ-साथ इसे गौरवशाली परंपरा के रूप में स्थापित करना है।



